दिल्ली की सड़कों पर सफ़र करते समय हमें चाहे-अनचाहे कई तरह के अनुभवों से दो-चार होना पड़ता है. बीती रात अपने एक मित्र के साथ ऑफिस से घर जाते समय रास्ते में मैं भी एक ऐसे ही दृश्य से दो-चार हुआ और मेरा मोबाइल कैमरा इस दृश्य को अपने लेंस में क़ैद करने के लिए उद्वेलित हो उठा और मैं भी फिर अपने-आप को रोक नहीं सका और चलती बाईक से ही एक के बाद एक कुछ तस्वीरें ले कर अपने मन को और मोबाइल कैमरे की उद्वेलना को शांत किया. फिलहाल ये तसवीरें मेरे इस चक्र में विचरण करने वालों के लिए भी प्रस्तुत हैं..
Friday, 25 February 2011
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