Tuesday, 26 June 2012

माही तू बहुत याद आएगी..


आँखों में चमकते सुनहरे से सपने,
और-
चेहरे पर छाई वो सुर्ख़ मासूमियत,
हमें कुछ सीखाने, हमें कुछ दिखाने,
आसमां से उतरी थी वो परी,
ज़िन्दगी के कुछ सपने सजाने,
ईश्वर की पूजा या ख़ुदा की वो नेमत,
आँगन में गूंजता वो निश्छल-सा बचपन,
पर-
हाय, जीवन-मृत्यु की ये कैसी है माया,
जिसमें बिखर गई वो मासूम सरगम,
'बोरवेल' की अंधेरी गहराईयों में,
एक और मीठी मुस्कान दफ़न हो गई,
जन्म-दिवस तो सौभाग्य ही लिखता,
फिर, तोहफ़े में क्यूँ मौत मिल गई,
जन्मदिन की ये अजब मृत्यु-गाथा,
इस बोझिल मन से कभी न मिट पायेगी,
दुनिया की रंग-बिरंगी चमक-दमक में भी,
'माही' तू बहुत याद आएगी..
'माही' तू बहुत याद आएगी..

निशान्त..