आँखों में पलते ख्वाबों की ताबीर नही देनेवाले,
जन्नत का गुमां हो जिसपर वो जागीर नही देनेवाले,
तुम सुलह करो या जंग करो मर्ज़ी तुम्हारी जो भी करो,
हम जान तो दे सकते हैं, मगर कश्मीर नही देनेवाले...
(दोस्त ने सुनाया है..)
Saturday, 26 January 2008
Saturday, 12 January 2008
इंग्लिश बाबुओं के लिए...
बड़े शौक से बैठे लगाने लिपस्टिक...
लगानी जिन्हें अपने हाथ से मेहंदी नही आती...
बड़ी हैरत है कि पैदा होकर हिंदुस्तान में साथी...
उन्हें इंग्लिश तो आती है, मगर हिन्दी नही आती...
लगानी जिन्हें अपने हाथ से मेहंदी नही आती...
बड़ी हैरत है कि पैदा होकर हिंदुस्तान में साथी...
उन्हें इंग्लिश तो आती है, मगर हिन्दी नही आती...
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