Monday, 24 December 2007

इन्साफ कि आवाज़



मेरा कहना है कि मुजरिमों को सजा दी जाये...


वरना दीवार अदालत कि गिरा दी जाये...


लेकिन, हममें से जो उभरता है वह बिक जाता है...


अगर ये आलम है तो किस किस दो सजा दी जाये...




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