Friday, 23 May 2008

दोस्त का है...

मेरी खामोश दोस्ती का,
इतना तो सिला दिया होता,
कभी एक नज़र चाहत से,
देख ही लिया होता,
हम भी तुझे इश्क-ओ-मोहब्बत से आशना करते,
बस एक बार अपने दिल में आने तो दिया होता,
क्या जाता तुम्हारा,
बस हमको भी दिल से खुशी मिलती,
अपनी ज़िंदगी की किताब में,
नाम हमारा भी लिख लिया होता,
देख लेते ज़रा गौर से शायद,
तुम्हारे हाथ की लकीरों में,
हमारी किस्मत का भी दिया होता,
मेरी खामोश दोस्ती का इतना तो सिला दिया होता॥!!!
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4 comments:

Udan Tashtari said...

मेरी खामोश दोस्ती का इतना तो सिला दिया होता
बहुत बढ़िया.

शोभा said...

बस हमको भी दिल से खुशी मिलती,
अपनी ज़िंदगी की किताब में,
नाम हमारा भी लिख लिया होता,
बहुत सुन्दर। स्वागत है।

अजित वडनेरकर said...

आपका स्वागत है श्रीमान् ...

Aruna Kapoor said...

वाह्!वाह्!....बहुत ही उमदा शायरी!