Tuesday, 19 August 2008

एक ख्वाब




दिल की बात...


देखा था एक ख्वाब, वो शायद टूट गया,


ऐसा लगता है- साथ उनका भी कहीं छूट गया,


कल जब थम जाएँगी साँसे मेरी,


तब तू सोचेगा- क्यूँ ? आख़िर क्यूँ तू मुझसे रूठ गया...


न होगा कोई जवाब फ़िर इसका,


न होगा कोई हिसाब इसका,


होगी तो सिर्फ़ तन्हाई ज़िन्दगी में,


तब समझेगा तू- ख्वाब तेरा अधूरा ही टूट गया...


1 comment:

seema gupta said...

तब समझेगा तू- की ख्वाब तेरा अधूरा ही टूट गया...
" a poetry with lil bit pain of loosing something, with emotions, liked reading it ya"
Regards