
दिल की बात...
देखा था एक ख्वाब, वो शायद टूट गया,
ऐसा लगता है- साथ उनका भी कहीं छूट गया,
कल जब थम जाएँगी साँसे मेरी,
तब तू सोचेगा- क्यूँ ? आख़िर क्यूँ तू मुझसे रूठ गया...
न होगा कोई जवाब फ़िर इसका,
न होगा कोई हिसाब इसका,
होगी तो सिर्फ़ तन्हाई ज़िन्दगी में,
तब समझेगा तू- ख्वाब तेरा अधूरा ही टूट गया...
1 comment:
तब समझेगा तू- की ख्वाब तेरा अधूरा ही टूट गया...
" a poetry with lil bit pain of loosing something, with emotions, liked reading it ya"
Regards
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