Sunday, 25 October 2009

मिश्रा जी का ब्लॉग और मेरी प्रतिक्रिया..

ब्लॉग उपग्रह के मेरे सभी दोस्तों को आपके इस दोस्त का एक बार फ़िर जय हिंद। ज़िन्दगी के सफर में और रोज़गार में महारथ दिखाने की होड़ के कारण काफ़ी दिनों के बाद इस लोक में मेरा आना हो पाया है। हालाँकि, मुझे पता है कि आप लोगों ने मुझे ज़्यादा मिस नही किया होगा, फ़िर भी माफ़ी चाहूँगा। हाँ, ज़िन्दगी के इस भाग-दौड़ के बीच मुझे गूगल की ईमेल सेवा के ज़रिये मिश्रा जी का ब्लॉग पढ़ने का गर्व हासिल होता रहता है, जो हर हफ्ते या फ़िर हफ्ते में २ बार ज़रूर ही मेरे इन्बोक्स में आकर टिमटिमाता रहता है। अब आप सोच रहे होंगे की मेरी इन बेबाक बातों में कौन से मिश्रा जी आ गए। अरे भाईलोगों मिश्रा जी रोज़गार के क्षेत्र में मेरे सहयात्री, मेरे सीनियर और कहीं-न-कहीं मेरे मार्गदर्शक भी हैं। हाँ, आपलोगों की जानकारी के लिए इतना बता दूँ की मिश्रा जी इस उपग्रह का नियमित रूप से भ्रमण करते हैं और अपने बेबाक अंदाज़ से आम जनमानस को अवगत भी कराते रहते हैं। जहाँ तक मुझे याद है ब्लॉग के इस मज़बूत खिलाड़ी को इस उपग्रह पर आने का ख़्याल शायद साल २००७ में आया था। तब से लेकर आज तक मिश्रा जी अपने तरकश 'विनोद मिश्रा का ब्लॉग' और 'बकवास रिपोर्ट' के माध्यम से न जाने कितने ही पहलूओं को खंगालने की कोशिश कर चुके हैं। एक तरफ़ जहाँ इसमें आमजन की बातें हैं तो सरकारी पॉलिसी पर कभी सहमति तो कभी काफी ज़ोरदार अंदाज़ में मुखालफत भी है। मिश्रा जी अपने ब्लॉग के माध्यम से उन समस्याओं पर भी चोट करने में जुटे हुए हैं जो इस पूरे मुल्क के लिए चुनौती बनी हुई हैं। लेकिन सियासी मामलों पर मिश्रा जी के ख्यालात अक्सर मेरे सवालों का जवाब नही दे पाये हैं। इसकी एक वजह शायद मेरा दक्षिणपंथी जमातों से शुरू से ही तालुक़्क़ात रखना भी हो सकता है। ऐसे में कई बार मेरी कोशिश होती है कि मैं मिश्रा जी को अपने ख्यालातों कि तरफ़ मोड़ सकूं। लेकिन, मेरी कोशिशें मिश्रा जी को आजतक दक्षिणपंथ कि तरफ़ मोड़ नही पायीं हैं। हालांकि, सरकारी पॉलिसी पर उनकी कई दलील आपको भी ज़रूर सोचने पर मजबूर करेंगी। लेकिन, मेरे जो यक्ष प्रश्न आज भी मिश्रा जी के सामने घूम रहे हैं उनका जवाब मुझे कब मिलेगा। इसीलिए, इस उपग्रह के सभी वासियों से मेरा अनुरोध है कि मिश्रा जी के मोहल्ले में ज़रूर भ्रमण करें और उनके ख्यालातों पर अपनी बात भी रखें। हो सकता है कि सियासी विकल्प ढूँढने के मेरे सवालों के जवाब शायद आपके ख्यालों में ही निकल आयें। नही तो फ़िर हमसब मिल कर कम से कम मिश्रा जी पर इस बात का दबाव तो बना ही पाएंगे कि ब्लॉग लिखने के साथ-साथ या तो हमारे सवालों का जवाब भी ढूंढें, नही तो दक्षिणपंथ विचारधारा में ही शामिल हो जाएँ। ब्लॉग उपग्रह के आप सभी प्राणियों की सहूलियत के लिए मैं आपको मिश्रा जी के ब्लॉग का लिंक भी दे रहा हूँ। तो ब्लॉग की दुनिया के मेरे महारथी साथियों एक बार मेरी तरफ़ से दिए जा रहे इस लिंक पर क्लिक कीजिये और मिश्रा जी के द्वारा लिखी जानेवाली पांडुलिपियों पर अपनी बेबाक राय दीजिये।
धन्यवाद॥

1 comment:

Udan Tashtari said...

जय हिन्द!!