Tuesday, 7 December 2010

कुछ और तस्वीरें गाँव की..

तस्वीरों के माध्यम से गाँव की कुछ यादों को सहेजने का मुझे एक और मौक़ा मिला, जिसे मैं अपने चक्र में फँसने वाले सभी मुसाफिरों के सामने एक बार फिर प्रस्तुत कर रहा हूँ..
                     (ऐसा तांगा वाला देखा है कभी..??)

                     (और अब तांगा चलाने की तैयारी..)

                     (गाँव का साप्ताहिक बाज़ार..)

           (साप्ताहिक बाज़ार की एक अलग ही रौनक होती है..)

      (इस बाज़ार में फल, सब्जी, अनाज कुछ भी खरीद सकते हैं..)

             (साथ में चाय-नाश्ते का भी पूरा इंतजाम रहता है..)

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