Tuesday, 28 September 2010

लता ताई के जन्मदिन पर चंद पंक्तियाँ..



संगीत के तरन्नुम में लिपटी एक शोख़ आवाज़ जब उनके लबों से निकलती है,
               
एक सुकून का एहसास देकर, वो रूह तक उतरती है,

सुरीली आवाज़-वो-अंदाज़ का एक जादू कहीं अनंत तक गूँज रहा है,

संगीत को भी नाज़ है खुद पर, जब सारा गुलिस्तां ही लता ताई के सुरों से महक रहा है..

स्वर-कोकिला को जन्मदिन की ढेरों बधाई..
निशांत..

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