Thursday, 5 May 2011

ओसामा की मौत पर एक जेहादी का दर्द..


आतंक की राह में देखो अब दोस्त भी बेगाने हो गए,
हमको अनाथ बना कर ओसामा जी कहाँ तुम चले गए,
वो शानो-शौकत की ज़िन्दगी को ठोकरें मार कर,
लादेन, जो तुम चल पड़े खौफ़ और दहशत की राह पर,
हर रूह आज भी कांपती है बस तुम्हारे नाम से,
पहचान बनाई है दुनिया में तुमने अपने इंतकाम से,
जेहाद की उन मीठी यादों को पल भर में तोड़ गए,
हमको अनाथ बना कर ओसामा जी कहाँ तुम चले गए..
वो वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की बुलंदियों को मिट्टी में मिला दिया,
अमेरिका के गिरेबान को एक झटके में तुमने हिला दिया,
वो ख़ुदकुश हमलों में जो हर रोज़ बिखर रही है ज़िन्दगी,
लादेन तुम्हारे नाम में ही अब झलकती है दरिंदगी,
अल-क़ायदा के क़ायदों को क्या अब तुम ही भूल गए,
हमको अनाथ बना कर ओसामा जी कहाँ तुम चले गए..
वो एके-47 की गोलियां जो बरसती थी दुश्मनों पर,
तुम्हारा ही पाठ पढ़ कर हम चलते रहे राहे मौत पर,
बोलो, तुम्हारे बाद अब हमारा अंजाम क्या रहेगा,
दहशत ही ग़र मज़हब है तो इसका ठेकेदार कौन बनेगा,
सवाल हज़ारों छोड़ कर ख़ुद तुम ही बेवफ़ाई कर गए,
हमको अनाथ बना कर ओसामा जी कहाँ तुम चले गए..
सोचते थे तुम्हारी राहों पर चल कर जो हम फ़ना हो जायेंगे,
तो, जन्नत ही होगी नसीब में या फ़रिश्ते हम कहलायेंगे,
पर, जब तुम्हारे ही मुक़द्दर में जो दो गज ज़मीं नहीं रही,
फिर हम कैसे कहें कि दहशत की ये राह है सही,
शायद यही सोच कर 'कवि केतु' भी जेहाद से दूर हो गए,
हमको अनाथ बना कर ओसामा जी कहाँ तुम चले गए..
हमको अनाथ बना कर ओसामा जी कहाँ तुम चले गए..

निशांत केतु.....

3 comments:

ASTHA said...

Gud Ketu........


Ye Ketu Chakr pasand aaya
Osama Khush hua :)

Anonymous said...

oh great ketu
don't call yourself as a kavi ,you are maha kavi dear.go ahead ....

मुनीश ( munish ) said...

good poem.